Tuesday, 31 December 2013

तुझ से है


सूरज कि लाली तुझ से है; बाग़ो कि हरयाली तुझ से है
तुझ से है सभी प्रेम की डोर; यह चढता संगीत तुझ से है

नर्तक का नाच तुझ से है; मेहकता हुआ है आज तुझ से है
तुझ से ही भरते है पैमाने; ये मौसम-ऐ-बाहार तुझ से है

मंदिर यू शांत तुझ से है; मस्जिद की आजान तुझ से है
तुझे किस बात कि खबर नहीं; मौला का ये नाम तुझ से है

जीवन कि थक्कान तुझ से है; मौत का आराम तुझ से है
तुझ ही में खिला है राम; ज़िन्दगी हराम तुझ से है

क्यूँ रह गया तू दरिद्र; कहाँ खो गया  तेरा राज
तुझे जब तेरी खब्बार नहीं; ये पूरा आशियाँ तुझ से है


                                                                            - ध्यान युवन




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